Life Management

आप जैसा सोचगें, वैसा ही बन जायेंगे !

आप जैसा सोचते हैं वैसा ही बन जाते हैं, दोस्तों मुझे इसके दो पक्ष दिखाई देते हैं और दोनों ही एक दूसरे से जुड़े हुए हैं पहला तो ये कि अभी तक तो आपने ये सुना होगा कि ये सोचना बंद करों मेहनत करों मेहनत तब जा के कुछ होगा और दूसरा पक्ष ये कि बस तो फिर बन गयी बात सिर्फ सोच लो, क्योंकि जो सोचेंगे वो बन जायेंगे मेहनत करने कि आवश्यकता ही नहीं हैं |

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सबसे पहले बात करते हैं पहले पक्ष की कि मेहनत करों सोचने से कुछ नहीं होता | अब मुझे एक सवाल का जवाब दीजिये कि आप बिना सोचें कुछ कर सकते हैं क्या? अगर आपका जवाब हां हैं तो फिर आप सही हैं अगर आप का जवाब ना हैं तो फिर आप पागल हैं मुझे इस शब्द के लिए माफ़ कीजियेगा मैं ये शब्द जान बूझकर इस्तेमाल कर रहा हूँ पागल | जी हाँ अगर आप बिना सोचे कुछ करते हैं तो फिर आप पागल ही हैं, क्योंकि एक पागल इंसान ही बिना सोचे कुछ करता हैं | आपने ये जरूर नोटिस किया होगा कि कभी-कभी हम कुछ ऐसा काम कर देते हैं बिना कुछ सोचे समझे, तो आपके अपने ही कह देते हैं कि तू पागल हैं क्या, तुझमे अक्ल नहीं हैं, पागलों जैसी हरकत क्यों कर रहा हैं | मुझे लगता हैं आप सभी इससे दो-चार हुए होंगे | आपने कभी किसी पागल इंसान को देखा होगा जो बेचारा कुछ सोचता ही नहीं हैं वो कहीं भी बैठ जाता हैं कहीं भी चल देता हैं कहीं पर भी कुछ भी करने लग जाता हैं |

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आपको शायद जानकार हैरानी हो सकती हैं कि हम बिना सोचे तो बोल भी नहीं सकते कुछ करना तो दूर की बात हैं, अब आप कहेंगे कि ये क्या कह रहे हैं आप, हम तो नहीं सोचते हम तो बिना सोचें ही बोलते हैं, हमें सोचने की जरूरत ही नहीं पड़ती | लेकिन दोस्तों यकीन मानिये हम बिना सोचे बोल ही नहीं सकते | अगर आपको ऐसा लगता हैं कि हम बिना सोचें ही बोलते हैं तो माफ़ कीजिये आप गलत हैं | देखिये बोलते वक्त हम सभी अपनी भाषा में बात करते हैं जो हम बचपन से बोलते आ रहे हैं तो जो हमारी भाषा हैं वो हमारे दिमाग में इतनी अच्छी तरह से रच बस गयी हैं कि जब हम बोलते हैं, बोलने से पहले सोचते हैं वो इतना तेजी से होता हैं कि हमको अहसास ही नहीं होता कि हमने बोलने में कुछ सोचा भी | आपको शायद समझ नहीं आया होगा चलिए एक उधारण से समझते हैं |

आपनें कभी दूसरी भाषा सीखी ही होगी चाहे वो इंग्लिश हो, संस्कृत हो, उर्दू हो, हिंदी हो कोई भी भाषा हो वैसे लगभग सभी लोग इंग्लिश तो सीखते ही हैं क्योंकि इंग्लिश एक इंटरनेशनल भाषा हैं, सीखते नहीं तो पढ़ते तो सभी हैं | अब आप बताइए जब आप इंग्लिश बोलने कि कोशिश करते हैं तो क्या आप बिना सोचे ही बोल लेते हैं जवाब होगा नहीं, आप पहले अपनी भाषा में सोचकर translate करते हैं और फिर बोलते हैं और ज्यादातर लोगो की इंग्लिश न बोल पाने की यही समस्या हैं तो ऐसा क्यों हैं क्योंकि इंग्लिश आप अभी सीख रहे हैं आपके दिमाग में रची बसी नहीं हैं कि आप फटाफट बोल सकें और हिंदी आप बचपन से बोल रहे हैं आपने अपनों को देख-देख कर सीखा हैं, कोई किताब से नहीं सीखी, तो वो आपके दिमाग में इस तरह रच बस गयी हैं कि आपका दिमाग इतनी तेज़ी से शब्दों को सोचता हैं कि आपको पता ही नहीं चलता कि हमनें सोचकर बोला हैं | तो दोस्तों इस भ्रम को तो अपने दिमाग से निकाल दीजिये कि बिना सोचे कुछ हो सकता हैं सोचना तो आपको पड़ेगा | तभी आप एक्शन ले पाओगे |

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चलिए अब दूसरे पक्ष पर आते हैं कि सोचने से ही बात बन जाएगी | अगर आप ऐसा सोच रहे हैं तो फिर से आप गलत हैं | जब तक सोंच को एक्शन में नहीं लाया जाये वो सोच किसी काम कि नहीं वो फिर बस आपके दिमाग के एक कोने में पड़ी रहती हैं बस इससे ज्यादा कुछ नहीं | मतलब की जो सोचते हैं उसको अस्तित्व में लाइए |

अब बात करते हैं कि जैसा सोचते हैं वैसा बन जाते हैं देखिये जब आपको भूख लगती हैं और आप सोचते हैं कि मुझे खाना खाना हैं तभी मेरी भूख शांत होगी तो आप खाना खाते हैं तो आपकी सोच एक्शन में आई कि मुझे खाना खाना हैं तो आपकी भूख मिट गयी | देखिये अगर आप सोचते हैं कि मुझे एक्टर बनना हैं तो अगर आपने सोचा और उसे छोड़ दिया तो फिर कुछ नहीं होगा आप सोचते रहिये | यदि आप बार-बार सोचते हैं उठते-बैठते, सोते-जागते आप सोच रहे हैं कि मुझे एक्टर बनना हैं तो आप एक्टिंग करेंगे अगर आपको थोड़ी बहुत आती हैं तो आप और अच्छा करेंगे अगर बिलकुल भी नहीं आती लेकिन फिर भी आपकी सोच हैं कि मुझे तो एक्टर ही बनना हैं तो आप एक्टिंग सीखेंगे मेहनत करेंगे मतलब कि आपकी सोच एक्शन में आ गयी अस्तित्व में आ गयी | तो अब आपको एक्टर बनने से कोई नहीं रोक सकेगा | देखिये जब आप किसी एक चीज़ पर फोकस करते हैं सिर्फ उसी के बारे में सोचते हैं तो प्रक्रति भी आपका साथ देती हैं | देखिये मैंने एक विडियो देखा था शायद आपने भी देखा होगा उसमें बोलते हैं कि आपको बस सोचना हैं और ये प्रक्रति आपके सुर में सुर मिलाएगी और जो आप चाहते हैं मिल जायेगा | आपको क्या लगता हैं कि सिर्फ सोचने से जो आप चाहते हैं मिल जायेगा | अगर आपको लगता हैं, तो आप सोचिये कि मुझे ये गाड़ी मिल जाएँ, मिल जाएँ अपनी पूरी ताकत लगा दीजिये सोचने में आपको साईकिल भी मिल जाये तो मुझे बता देना |

भगवान् कहते हैं कि ”कर्म करने वाले की अपने आप मदद हो जाती हैं वो खुद ही अपनी मदद कर लेता हैं, मगर कर्महीन की मैं मदद कर के भी मदद नहीं कर सकता” ये बड़ी ही खुबसूरत लाइन कही गयी हैं |

दोस्तों जो आप करना चाहते हैं, बस करने लग जाइये जो आप बननें कि सोचते हैं उसको एक्शन में लाइए फिर आपकी सोच हकीकत में आपके सामने होगी || अच्छा सोचिये,बड़ा सोचिये ||

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