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Try Again And Try Again – बार-बार कोशिश कीजिये

दोस्तों मैं एक दिन ऐसे ही बैठा हुआ था तो मेरी नज़र एक चींटी पर पड़ी तो मैंने देखा कि वो चींटी बार – बार दीवार पर चढ़ती और फिर गिर जाती फिर चढ़ती और फिर गिर जाती तो उसने ऐसा कई बार किया और आखिर में उस चींटी ने दिवार पर चढ़ कर पार कर लिया | दोस्तों मैं ये कहानी आपको क्यों बता रहा हूँ ऐसी कहानी तो आप ने बचपन से लेकर आज तक बहुत पढ़ी होंगी/सुनी होंगी | दोस्तों मैंने इस छोटी सी चींटी की कहानी को इसलिए बताया हैं कि आप उस छोटी सी चींटी को देखिये वो बार – बार दीवार पर चढ़ती हैं पर वो चढ़ना नहीं छोड़ती उसकी कोशिश जारी रहती हैं और आखिर में उसे सफलता मिल जाती हैं वो अपने मुकाम पर पहुँच जाती हैं |

दोस्तों क्या हम इंसान/मनुष्य ऐसा करते हैं जवाब होगा बिल्कुल भी नहीं (हाँ कुछ लोग करते हैं और वहीँ लोग आज हमारे बीच सफल हैं ) दोस्तों हम क्यों ऐसा नहीं कर पाते आप सोचकर देखिये | हम घबराते हैं सोचते हैं की कही ये ना हो जाये वो न हो जाये पता नहीं क्या – क्या | और दोस्तों उस छोटे से जीव में ये सोचने की सकती नहीं होती की क्या होगा उसे तो बस अपना टारगेट नज़र आता हैं ओर उस टारगेट को पूरा करना ही उस समय में उसके लिए महत्वपूर्ण होता हैं फिर चाहे कितनी भी कोशिश बार – बार क्यों न करनी पड़े | दोस्तों हमारे पास तो सोचने समझने का प्रकृति का कितना अनमोल तोहफा हैं हम को प्रकृति ने सर्वश्रेष्ठ बनाया हैं इस धरती पर | फिर भी हम उस छोटे से जीव के आगे हाथ खड़ा कर देते हैं |

 

दोस्तों हम लोगो का तो हाल ये हैं की किसी काम को करने के दौरान अगर हमें उसमे सफलता हासिल नहीं हो तो हम दुबारा कोशिश करते ही नहीं और अगर किसी ने एक बार जोश में कोशिश कर भी ली तो वह फिर कभी उस काम को नहीं कर पाता वो मान लेता हैं की ये मेरे बसका नहीं हैं और वह खुद को बहुत ही थका हुआ किस्मत का मारा समझने लगता हैं ओर वो अपनी असफलता को यही तक सिमित नहीं रखता बल्कि उसी काम को करने वाले किसी दुसरे व्यक्ति के दिमाग में भी यही बैठा देता हैं की तुम ये नहीं कर पाओगे मैंने भी किया था भले ही वह व्यक्ति बेहतर तरीके से कर पाता पर वो करने से पहले ही हाथ खड़े कर देता हैं और अधिकतर लोग तो इन सबका दोष किस्मत को (भगवान को) देते हैं ”कि हमारी तो किस्मत ही ख़राब हैं”| दोस्तों आपको क्या लगता हैं क्या आपकी असफलता का दोष किस्मत पर या भगवान पर थोपना क्या सही हैं दोस्तों कम से कम मैं तो इसके समर्थन में नहीं हूँ | अगर आपने कोशिश ही नहीं की तो इसमें किस्मत का क्या दोष | दोस्तों मैं तो कहूँगा कि किस्मत नाम की कोई चीज़ कर्म से अलग नहीं हैं या यु कहूँ कि हैं ही नहीं | आपने सुना होगा ”कि किस्मत आपके हाथो में हैं”ज्योतिष देखते हैं न हाथो को खैर वो उनका काम हैं मैं उस पर बात नहीं कर रहा हूँ तो फिर किस्मत हैं कहा हर कोई किस्मत – किस्मत करता फिरता हैं |

मैं ये स्पष्ट करना चाहूँगा की आपके द्वारा किया गया कर्म ही आपकी किस्मत हैं | ( ये मेरे अपने विचार हैं आपका विचार अलग हो सकता हैं ) दोस्तों वैसे तो किसी काम की शुरुआत करना ही लोगो के लिए बहुत बड़ी बात हो जाती हैं आपको जानकार हैरानी होगी की कुछ नया या कुछ बड़ा जैसे की बिज़नेस करने की सोचने वाले लोगो में से लगभग 90% लोग कभी शुरुआत ही नहीं करते ये मैं अपनी तरफ से नहीं बता रहा हूँ एक सर्वे में सामने आया आंकड़ा हैं ये | अगर किसी ने शुरु कर भी दिया तो अगर शुरुआत में ही असफलता हाथ लग गयी तो वो फिर कभी कोशिश करते ही नहीं तो क्या यहाँ यह कहना ठीक होगा की हम मनुष्यों से वो छोटा सा जीव अपनी अन्तर्मन की शक्ति से ज्यादा मजबूत हैं उसमें द्रढ़ संकल्प हमसे ज्यादा हैं |

 

दोस्तों अगर कुछ करना हैं जिंदगी में तो शुरुआत कर दीजिये और असफलताओ से मत घबराइये ये तो आती रहती हैं इनसे सबक लीजिये और फिर कोशिश में लग जाइये यकीन मानिये दोस्तों आपको एक दिन सफलता जरूर मिलेगी | आप कोशिश करना मत छोड़िये |||| धन्यवाद ||||

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