Life Management

अपनी ताकत को पहचानों / Recognize Your Strength

दोस्तों मैं आज का टॉपिक एक छोटी सी कहानी से शुरु करना चाहूँगा असल में दोस्तों ये कहानी नहीं हैं ये एक सच्ची घटना हैं तो चलिए वक्त खराब न करते हुए मैं शुरु करता हूँ –

दोस्तों आपने देखा होगा की हाथी जो कि एक शक्तिशाली जानवर हैं उसको एक छोटी सी रस्सी से बाँधा जाता हैं लेकिन वो उस रस्सी को तोड़ता नहीं अगर उसे वो तोड़ दे तो आजाद हो सकता हैं बल्कि उसमें तो इतनी ताकत हैं कि वो मोटी – मोटी बेड़ियों को एक झटके में तोड़ सकता हैं लेकिन वो नहीं तोड़ रहा क्यों? आखिर क्यों नहीं तोड़ पाता वो उस पतली सी रस्सी को |

दोस्तों जब वो हाथी छोटे होते हैं और उनको पकड़कर लाया जाता हैं उनकी माँ से उनके साथियों से अलग कर दिया जाता हैं और लाकर उनको मोटी – मोटी बेड़ियों से बाँध दिया जाता हैं वो पूरी कोशिश करता हैं पूरी ताकत लगाता हैं लेकिन उन बेड़ियों को वो तोड़ नहीं पाता, क्योंकि उस बच्चे के अन्दर इतनी ताकत हैं ही नहीं कि वो बेड़ियों को तोड़ सके | उसको पाँव से गले से बाँधा जाता हैं तो जब भी वो बेड़ियों को तोड़ने की कोशिश करता हैं तो उसे बहुत दर्द होता हैं वो बेडियां उसके शरीर में गड़ जाती हैं जब वो उस कैद से छूटने की कोशिश करता हैं तो उसे और तेज़ दर्द होता हैं, क्योंकि बंधे होने के कारण उसके शरीर पर घाव बन जाते हैं वो कुछ दिनों तक रोज़ कोशिश करता हैं | लेकिन आखिर में वो कोशिश करना बंद कर देता हैं ये सोचकर कि कोशिश की तो बहुत दर्द होगा इससे तो अच्छा हैं कि जहाँ हैं जैसे हैं, यही रहे कम से कम दर्द तो नहीं सहना पड़ेगा | और जैसे – जैसे वो हाथी का बच्चा बड़ा होता हैं उसकी ताकत बढ़ने लगती हैं अब वो बच्चा बड़ा हो गया हैं तो उसे सिर्फ एक पतली सी रस्सी के सहारे बाँध दिया जाता हैं और अब तो उसमें बहुत ज्यादा ताकत हैं लेकिन अब वो उस पतली सी रस्सी को भी नहीं तोड़ सकता क्यों? क्योंकि उसके दिमाग में एक अवधारणा बन गयी हैं कि अगर मैंने इस रस्सी को तोड़ने की कोशिश की तो मुझे बहुत दर्द होगा जो कि बचपन से उसके दिमाग में बैठी हुई हैं, और दर्द सहने से तो अच्छा हैं की इस बंधन में बंधे रहो ओर कोशिश ही न करो कम से कम सुरक्षित तो हैं दर्द तो नहीं सहना पड़ेगा, और वो कोशिश ही नहीं करता |

दोस्तों अब अगर उस हाथी के कान में धीरे से कोई ये कह दे कि अरे ओ हाथी तुझमें बहुत ताकत हैं तू बहुत शक्तिशाली हैं अब ये सुनने के बाद आपको क्या लगता हैं क्या होगा | रस्सी तो क्या उसे मोटी जंजीरों से भी बांध दिया जाये तो उसे तोड़ने में एक सेकंड भी नहीं लगेगा, एक सेकंड भी नहीं, वो एक झटके में जंजीरों को तोड़ सकता हैं | क्योंकि अब उसे पता चल गया कि अच्छा मेरे अन्दर इतनी ताकत हैं उसकी बचपन से बनी हुई अवधारणा एक झटके में टूट गई |

दोस्तों उस हाथी की तरह हम सब ने भी ऐसी पता नहीं कितनी ही अवधारणायें बना रखीं हैं कि मैं ये नहीं कर सकता, मेरे बसका नहीं हैं और ये अवधारणायें अलग – अलग कई तरह की हो सकती हैं | ये अवधारणा जात – पात की हो सकती हैं, धर्म की हो सकती हैं, धन की हो सकती हैं कि मेरे पिताजी तो गरीब हैं मैं कुछ नहीं कर सकता, गाँव – शहर की हो सकती हैं कि मैं तो गाँव का हूँ मैं क्या कर सकता हूँ और भी पता नहीं क्या – क्या | और हम अवधारणाओं के आड़े अपने आप को बचा लेते हैं कि इसकी वजह से मैं ये नहीं कर सकता | धीरे – धीरे हम अन्दर से कमज़ोर पड़ जाते हैं और कभी कुछ नहीं कर पाते | उस हाथी की तरह हमारे दिमाग में बैठ जाता हैं कि मैं नहीं कर सकता |

जब हम अपनी आँखों पर काला चस्मा लगाते हैं तो हमे चारों तरफ सिर्फ छाया ही दिखाई देती हैं हमे लगता हैं कि धूप तो हैं ही नहीं, लेकिन क्या ये सच हैं वो तो ये चस्मा हैं जो आपको छाया दिखा रहा हैं और आपको यही लग रहा हैं कि बस छाया ही छाया हैं अगर आप इस चश्मे को हटा दे तो सच्चाई बिल्कुल विपरीत हैं | आपको जैसा दिख रहा था वैसा बिलकुल हैं ही नहीं |

दोस्तों आपकी जो भी अवधारणा बनी हुई हैं वो बिलकुल इस चश्मे का काम करती हैं आपको दिखाती कुछ ओर हैं बल्कि सच्चाई कुछ ओर हैं | दोस्तों आप सभी अपनी – अपनी अवधारणाओं को पहचानों पता करों कि वो कौनसी अवधारणायें हैं जो आपके दिमाग में बनी हुई हैं और आपको आगे बढ़ने से रोकती हैं | तोड़ दो उन अवधारणाओं को और अपनी असली ताकत को पहचानों |

दोस्तों उन अवधारणाओं के चश्मे को हटाकर देखिये देखना क्या हैं हटा ही दीजिये ये दुनिया बहुत अलग हैं, आप अलग हैं, आपकी ताकत अलग हैं | जैसा दिख रहा हैं उससे बिलकुल अलग |

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