Life Management

Do With 100 Percent|100 % फोकस कीजिये

जब आप कुछ नया सीखते हैं चाहे आप एक स्टूडेंट के रूप में क्लास रूम में हैं या आप जिंदगी में कही भी कुछ भी सीख रहे हैं वैसे तो हम रोज़ कुछ न कुछ सीखते ही रहते हैं भले ही वह छोटा सा ज्ञान ही क्यों न हो और वैसे भी कहा जाता है की हमे रोज़ कुछ न कुछ नया सीखते रहना चाहिए सिखने की कोई उम्र नही होती और दोस्तों मुझे लगता है की सीखने का कोई वक्त भी नही होता |

जब आप कुछ सीख रहे होते है तो लगभग सभी के साथ यही होता हैं कि वो सिखने के बाद या कुछ सुन रहे हैं या देख रहे हैं तो सुनने के बाद या देखने के बाद अक्सर यही कहते हैं कि यार कुछ समझ नही आया अगर आ भी गया हो तो पूरा नही आया | तो दोस्तों यहाँ पर क्या हो रहा है आपके साथ, आप तो उसे सुन भी रहे हैं देख भी रहे हैं अपना कीमती समय भी दे रहे हैं फिर क्या है ऐसा जो आप सीख नही पाते या समझ नहीं पाते इस पर जरा सोचिये  | आपका दिमाग” यहाँ पर आपका दिमाग आपका साथ नहीं दे रहा या यू कहे की आप अपने दिमाग को साथ देने का निर्देश ही नहीं दे रहे हैं या देना नहीं चाहते हैं क्योंकि ऐसा करके आप थोडा सा दिमाग को लगाने से बचाना चाहते हैं |

देखिये एक पानी के भरे हुए गिलास में आप और पानी डालने की कोशिश करेंगे तो सामान्य सी बात हैं की उस गिलास में पानी नही डलेगा सारा पानी बहार बह जायेगा लेकिन अगर आप उस गिलास को थोडा खाली कर देते है तो आप उसमे आसानी से पानी डाल सकते हैं तो फ्रेंड्स यही स्तिथि हमारे साथ होती हैं जब हम सुन रहे होते हैं समझ रहे होते हैं तो हमारा जो दिमाग हैं वो खाली नही होता दिमाग फालतू की बाते सोच रहा होता हैं आप पढ़ रहे हैं तो सोच रहे होते हैं की यार whatsaap खोलके देखता/देखती हूँ किसी का रिप्लाई तो नही आया हैं होता हैं न ऐसा | इससे आपका दिमाग फालतू की बातों से भरा रहता हैं जब तक आप उसे खली नहीं करेंगे आपका दिमाग कुछ भी accept नहीं करेगा |

जाहिर सी बात हैं दोस्तों भरे हुए दिमाग में कुछ जा ही नही सकता क्योंकि आपका दिमाग तो कही और हैं हाँ आप तो है वहा पर परन्तु आपका मन आपका दिमाग नहीं हैं तो फिर दोस्तों जब आपका दिमाग कही और हैं तो फिर आप कैसे कह सकते हैं की मैंने कुछ सिखा, और ऐसा करके आप अपने आप को ही धोखा देते हैं और फिर आप उस बेचारे सिखाने वाले को दोषी ठहराते हैं कि इसे कुछ आता नही होगा यही होता है दोस्तों | लेकिन दोस्तों अगर उस सिखाने वाले में कोई कमी होती तो जाहिर सी  बात हैं की फिर तो किसी के भी समझ में नही आना चाहिए | लेकिन ऐसा तो नही हैं आपकी क्लास में बगल में बैठा हुआ आपका साथी सही ढंग से समझ जाता हैं और आप नहीं, तो फिर कमी कहा हैं आपमें या सिखाने वाले में,आपके सुनने में या आपके देखने में जरा सोचिये | और दोस्तों यही पर आकर आप समझ नही पाते की आखिर वजह क्या हैं वजह तो साफ़ हैं परन्तु आप अपनी गलती स्वीकार करे जब तो क्योंकि आप तो गलत हो नही सकते ना |

दोस्तों जब आप किसी को सुन रहे हैं कुछ सीख रहे हैं तो अपने दिमाग को खाली करके तब  सुनिए, क्योंकि तभी आप असल में अपने साथ न्याय कर पाएंगे | दिमाग खाली करने का अर्थ आप कुछ गलत न लगा ले | मेरा यहाँ आप से कहने का अर्थ हैं की जब आप कोई एक काम कर रहे हैं सुनने का, देखने का, चाहे आप क्लास में पढ़ रहे हैं या कुछ और काम कर रहे हैं अपनी पूरी एकाग्रता के साथ कीजिये आपका दिमाग 100 percent उसी काम पर होना चाहिये तभी आप अच्छे ढंग से सीख पाएंगे और असल में यही तो समय का सदुपयोग हैं | इसी बात को आपके कर्म पर, आपके कुछ करने पर भी लागू कर सकते हैं |

तो फ्रेंड्स मैं आपको सरल और आसान शब्दो में यही कहूँगा की आप अपने दिमाग की और मन की पुर्णतः स्तिथि में रहिये | इससे आपका समय भी बचेगा और आपको कोई भटकाव भी नहीं होगा तो इसी के साथ ही दोस्तों अब शब्दो को समाप्त करने की इजाजत चाहता हूँ मेरी शुभकामनायें आपके साथ हैं |  नमस्कार ….

 

 

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