Life Management

खुद में परिवर्तन लायें ! Changes In Yourself

नमस्कार दोस्तों आशा हैं आप सब अच्छे होंगे | आज हम बात करेंगे परिवर्तन पर कि क्या हम अपने आप में या अपने आस-पास परिवर्तन लाते हैं और लाते हैं तो कितना लाते हैं | आज मैं अपनी बात देश में चल रहे सफाई अभियान को केंद्र में रखकर करना चाहूँगा |

पूरे भारत में सफाई अभियान चल रहा हैं सरकार हर तरह से tv के माध्यम से, न्यूज़ पेपर के माध्यम से लोगो को अपने आस-पास सफाई रखने का संदेश दे रही हैं लेकिन फिर भी गंदगी हैं यहाँ तो ये हाल हैं कि जहाँ लिखा हैं कि ”यहाँ गंदगी न फैलाये” वहीँ पर लोग गंदगी ज्यादा फैलाते हैं | क्या हैं ये, क्या ये एक मजाक हैं | हम लोग सरकार को दोष देते हैं कि सरकार सफाई नहीं करती ये नहीं करती, वो नहीं करती | आपको क्या लगता हैं कि ये सिर्फ एक देश की सरकार की जम्मेदारी हैं या हमें भी कुछ करना चाहिए | क्या हम देश के नागरिक नहीं हैं क्या हमारा फ़र्ज़ नहीं हैं कि अपने आस-पास सफाई रखकर अपने देश को स्वच्छ रखें |

मैं एक दिन ट्रेन के इंतज़ार में स्टेशन पर खड़ा था तो मैंने देखा एक भाई साहब platform पर ही गुटखा खा के थूक रहे हैं, वाह रे मेरे देश के लोगो क्या यही फ़र्ज़ निभाते हैं हम लोग |

जब तक हम खुद यानि इस देश का एक-एक नागरिक इस अभियान में शामिल नहीं होगा तब तक चाहे सरकार कितना भी प्रचार कर ले सफाई करने का | हम एक स्वच्छ भारत का निर्माण कर ही नहीं सकते | अब आप सोचेंगे कि ये काम तो सरकार का हैं अरे क्या सरकार ही आपके घर में झाड़ू निकाल दे, क्या सफाई कर दे क्या | किसने कहा हैं कि आप झाड़ू लेकर सड़क पे उतरिये आप अपने घर में अपने आस-पास तो सफाई रख ही सकते हैं, अगर कोई गंदगी फैलता हैं तो उसे रोक सकते हैं और उसे समझा सकते हैं | आप शुरु तो कीजिये फिर एक दिन ऐसा होगा जिस दिन सिर्फ एक देश ही नहीं पूरा विश्व स्वच्छ होगा |

जब तक आप खुद में परिवर्तन नहीं ला सकते तो बाहर बदलाव लाने का आप सोच भी कैसे सकते हैं समस्या ये हैं कि लोग सोचते हैं कि वो करेंगे और उससे भी बड़ी समस्या ये हैं कि वो भी यही सोचते हैं कि वो करेंगे | तो बदलाव कैसे आएगा |

अभी हाल ही में देश में प्लास्टिक थैलियों को बंद किया गया हैं ताकि प्रदूषण को कम किया जा सकें | लेकिन मैंने देखा हैं कि लोग जबरदस्ती दुकान वाले से थैली मांग रहे हैं और बहस करने लग जाते हैं, क्या इस तरह हम पर्यावरण को बचायेंगे | क्या हैं ये, क्या इसे हम परिवर्तन कह सकते हैं क्या इसे हम जागरूकता कह सकते हैं, और ये बातें तो मैं आपको सिटी की बता रहा हूँ जहाँ पर ज्यादातर पढ़े लिखें लोग होतें हैं | जबकि गाँव के लोग ऐसा नहीं करते मुझे तो लगता हैं कि गाँव के अनपढ़ लोग शहर के पढ़े लिखें लोगों से ज्यादा अच्छी तरह से समझते हैं वो लोग प्रक्रति के साथ जीते हैं | मैं आपको ये इतने विश्वास के साथ इसलिए बता रहा हूँ क्योंकि मैं खुद एक गाँव का ही रहने वाला हूँ गाँव वालों को तो अगर दुकान से थैली नहीं मिले तो अपनी शर्ट की झोली में सामान डालकर ले आते हैं, बड़े-बुजुर्ग अपने सर की पगड़ी को खोलकर उसमें ले आते हैं, क्या आपने शहरों में ऐसा कुछ देखा हैं, जाहिर हैं नहीं देखा होगा |

दोस्तों अपने आप में परिवर्तन लाइए आप पहल कीजिये आप पहल करेंगे तभी आपको देख-देख कर लोग जागरूक होंगे | अपने आस-पास सफाई रखें | दोस्तों ये बात मैं सिर्फ भारत में चल रहे सफाई अभियान पर ही नहीं कह रहा हूँ बल्कि ये बात हर जगह पर लागू होती हैं आप रिश्तो में देख लीजिये पति चाहता है कि उसकी पत्नी उसके अनुसार अपने आप को बदल ले जबकि खुद अपने आप में कुछ भी बदलाव नहीं लाना चाहते | दोस्तों हम इस पर आगे अगले आर्टिकल में बात करेंगे |

|| स्वच्छ भारत अभियान,एक कदम स्वच्छता की ओर ||

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