Life Management

Change In Yourself | Part-2 | In Hindi

दोस्तों स्वागत हैं आपका | हमनें पिछले आर्टिकल में परिवर्तन पर बात की थी जिसे हमने सीधे-सीधे तौर पर स्वच्छ अभियान से जोड़कर बात की थी | तो चलिए आज हम उसी को आगे बढ़ाते हैं कि परिवर्तन हमारी जिन्दगी से कैसे जुड़ा हुआ हैं | क्या हमें सच में परिवर्तन की जरूरत हैं |

दोस्तों आप देखिये कि एक पति अपनी पत्नी को बदलना चाहता हैं कि वो मेरे अनुसार सब कुछ करे | अगर आप एक पति हैं तो क्या आपने कभी अपने आपको बदलने की कोशिश की चलिए कोशिश छोड़िये कभी सोचा भी | ये सिर्फ एक पति-पत्नी की ही बात नहीं हैं लोग अपने आस-पास के लोगो को व अपने परिवार के सदस्यों को बदलने की कोशिश करते हैं मगर खुद में कोई परिवर्तन नहीं चाहते, जैसे हैं वैसे ही बने रहना चाहते हैं | आप सभी ने पति पत्नी में झगड़े होते हुए जरूर देखे होंगे या फिर अपने ही परिवार के किसी सदस्य से झगड़ते हुए देखा होगा वैसे ज्यादातर मामलें में पति-पत्नी के ही होते हैं | मुझे लगता हैं कि इस झगड़े का सबसे बड़ा जो कारण हैं वो यही हैं की लोग अपने आपको बदलना नहीं चाहते | मैं ये बात सबके लिए कह रहा हूँ |

आप सोच कर देखिये अगर पति-पत्नी के रिश्ते में दोनों अपने आप में परिवर्तन करें, बदलाव लायें तो जिंदगी कितनी खुशनुमा होगी आप उनके अनुसार खुद को बदल ले वो आपके अनुसार खुद को बदल ले | यहाँ आप बदलाव लाने का अर्थ कुछ गलत मत समझिये मैं ये नहीं कह रहा कि जो वो कहता हैं या कहती हैं आप वैसा ही करें, मेरा यहाँ बदलाव लाने का मतलब समस्या से हैं जैसे किसी दो व्यक्तियों के बीच कुछ बात की वजह से झगड़ा हो जाये तो आप दोनों को उस स्थिति को, उस बात को समझना हैं और अपने आपको उसके अनुकूल ढाल लेना हैं फिर कोई झगड़े वाली बात ही नहीं रहती |

लोग शराब पीते हैं जुआ खेलते हैं और अन्य नशा करते हैं पता नहीं क्या-क्या | मैंने देखा हैं कि अगर किसी परिवार में कोई बहुत ज्यादा शराब पीता हैं तो उसको उसके परिवार वाले झाड़-फूंक वाले बाबा के पास ले जाते हैं | ऐसा करने के बावजूद भी वो लोग नशा करना नहीं छोड़ते | आप देखिये कितना अन्धविश्वास हैं लोगो में | आपको क्या लगता हैं कि ऐसे कोई नशा छोड़ सकता हैं ये सिर्फ तभी हो सकता हैं जब आप खुद अपने आप में परिवर्तन करने की ठान ले | नशा करना हैं तो अच्छे काम करने का नशा कीजिये लेकिन लोग अपने आप को बदलना ही नहीं चाहते जैसे हैं वैसे ही रहना चाहते हैं | ऐसे में तो दूसरों की कोशिश भी बेकार हैं अगर किसी को कोई बदल सकता हैं तो वो खुद ही हैं |

मैं तो कहूँगा कि परिवर्तन बहुत जरूरी हैं | आप प्रक्रति को देख लीजिये पूरी प्रक्रति परिवर्तन शील हैं प्रक्रति अपने आप में बदलाव करती रहती हैं कभी शर्दी आती हैं, कभी गर्मी तो, कभी वर्षा | आप अन्न को देखिये सबसे पहले उसे खेत में उगाते हैं फिर पकने के बाद उसे काटते हैं फिर अनाज को अलग करते हैं बाकी बचा भूसा पशु को खिलाते हैं फिर अनाज को पीसा जाता हैं फिर उसकी रोटियां बनाई जाती हैं आप देख रहे हैं की कितना परिवर्तन आता हैं | तो हम ये क्यों नहीं समझते |

दोस्तों एक जगह पर इकठ्ठा पानी भी गन्दा हो जाता हैं परिवर्तन लाते रहिये अपने आप को एक ही सांचे में मत ढालियें सांचे को बदलते रहिये तब जिंदगी का मज़ा ही कुछ और होगा | परिवर्तनशील रहिये ||

Spread the love

One Commnet on “Change In Yourself | Part-2 | In Hindi

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *