Life Management

मन की मत सुनों – मन के साथ खेल खेलों

दोस्तों मैंने अक्सर लोगों को ये कहते हुए सुना हैं आपने भी सुना होगा और शायद आप ही वो हो सकते हैं जो कहते हैं कि यार आज पढ़ने का मन नहीं कर रहा, आज काम करने का मन नहीं कर रहा, आज फिल्म देखने का मन कर रहा हैं, आज दोस्तों के साथ गप्पे मारने का मन कर रहा हैं, आज कुछ चटपटा खाने का मन कर रहा है | ”मन” – क्या हैं ये मन, कौन हैं ये मन? क्या आपको नहीं लगता की आप अपने मन के ही गुलाम हैं ये बिल्कुल उसी तरह हैं जैसे कि आपकी गाड़ी का स्टेरिंग किसी और के हाथों में थमा दिया जाये और अब वो ड्राईवर आपको कहीं भी ले जा सकता हैं आप कुछ नहीं कर सकते आप उसके गुलाम है | दोस्तों ये बात शायद आपको हजम नहीं होगी पर यही सच हैं और कहते हैं ना कि सच कड़वा होता हैं | लेकिन दोस्तों अपने इस सच को पचाने की कोशिश कीजिये | ये जान लीजिये कि अगर आप इस सच्चाई को पचा लेते हैं तो आपकी जिंदगी कुछ और हो सकती हैं जो अब हैं उससे अच्छी उससे बेहतर |

चलिए दोस्तों ये तो बात थी समस्या की | अब आते हैं इसके समाधान पर की हम कैसे अपने मन पर लगाम लगा सकते हैं कैसे इसे अपने अनुसार काम में ले सकते हैं दोस्तों समस्या तब होती हैं जब आप मन के अनुसार करते हैं जैसा मन कहता हैं |

दोस्तों मन को सिर्फ एक तरीके से अपने कंट्रोल में किया जा सकता हैं जब भी आपका मन कुछ करने को करे कुछ खाने को करे तो आप वो मत कीजिये, मन के खिलाफ जाइये उसके खिलाफ एक्शन लीजिये | उधारण के तौर पर अगर आपका मन पढ़ने का नहीं कर रहा हैं तो आप मन के खिलाफ जाइये और पढ़ने लग जाइये, अगर मन कर रहा हैं कि आज कुछ तीखा खाया जाये तो आप मीठा खाइए | मेरे कहने का मतलब हैं की आपका मन जो कह रहा हैं उसे ना करके कुछ और करने लग जाइये, मन के खिलाफ जाइये, मन के साथ खेल खेलिए | इससे होगा क्या कि जैसे ही आप ये सब करेंगे तो आपकी अपने मन पर कमांड हो जायेगी मन समझ जायेगा की यार ये जो आदमी हैं यानि की आप | ये तो मेरे खिलाफ हैं ये तो मेरी मान ही नहीं रहा, मेरे अनुसार कर ही नहीं रहा हैं | तो मन आपके सामने घुटने टेक देगा/वो सरेंडर कर देगा और आप मन को अपने अनुसार कंट्रोल कर पाएंगे | इसके साथ ही आप सुबह-सुबह थोड़ा टहलने जाइये प्रक्रति के साथ थोड़ा समय बिताइए |

हाँ ये जरा मुश्किल तो हैं पर नामुमकिन नहीं हैं, क्या हैं कि आप इसके खिलाफ जाने की हिम्मत ही नहीं करते क्योंकि मन की सुन कर आपको भी आनंद आ रहा होता हैं तो भला कौन ऐसा होगा जो आनंद को ठुकराकर इतनी मुश्किलों का सामना करेगा, जाहिर हैं नहीं करेगा और वह मन का गुलाम बनकर ही रह जाता हैं | तो मेरे प्यारे दोस्तों अगर जिन्दगी में कुछ अलग करना हैं तो ये आनंद तो त्यागना ही पड़ेगा वरना फिर बने रहिये मन के गुलाम | दोस्तों आप कोशिश तो करके देखिये आप सिर्फ 21 दिन ऐसा करके देखिये फिर देखिये आपका मन कैसे नहीं आता हैं आपके कंट्रोल में आएगा ही अगर आप सच्ची लगन से करेंगे तो आएगा ही |

 

[ नोट – दोस्तों आपके सुझाव पूरी तरह से आमंत्रित हैं आप अपने सुझाव मुझे कमेंट करके या contact us में जो email दी गयी हैं उस पर भेज सकते हैं | ]

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