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क्या सच में आप दुःखी हैं – Are You Really Sad

दोस्तों क्या आपने ऐसा कोई इंसान देखा हैं जो ये बोलता हो की मैं सुखी हूँ इसमें आप भी शामिल हैं  जाहिर हैं नहीं सुना होगा | अगर सुना हो तो प्लीज मुझे बताये वो कौन हैं ( चाहे आप खुद भी हो ) | मुझे लगता हैं कि शायद कोई विरले ही होगा जो की बोलता हो कि मैं सुखी हूँ अपनी जिंदगी में | अगर आंकड़ो की बात करे तो ये 0.00001% के आंकड़ो में होगा शायद इससे भी कम |

चलिए ये तो हो गई आंकड़ो की बात और समस्या की बात | अब जरा इसे समझने की कोशिश करते हैं दोस्तों जो इंसान दु:खी रहता हैं कहता फिरता है कि मैं बहुत दुःखी हूँ क्या सच में वो दुःखी हैं या फिर ये इंसान की फितरत हो गयी हैं या आदत हो गयी हैं दुःखी रहना | अगर सुखी हैं तो भी दुःख का रोना | मुझे तो लगता हैं कि इंसान अपने दुःख को छोड़ना ही नहीं चाहता अब आप कहेंगे की ये क्या बात हुई, भला कौन ऐसा होगा जो जान बूझकर दुःखी रहना चाहेगा लेकिन ये सच हैं दोस्तों कम से कम मुझे तो ऐसा ही लगता हैं |

दोस्तों सच तो ये हैं कि जो हम दुःख – दुःख का रोना रोते हैं वो असल में दुःख हैं ही नहीं अब आप कहेंगे क्या बात कर रहे हो दुःख दुःख नहीं हैं | जी हाँ दोस्तों हमारी जिंदगी में जो दुःख होते हैं वो अधिकतर [लगभग 95%] दुःख नहीं बल्कि समस्यायें होती हैं और समस्या ये हैं कि हम लोग समस्या को दुःख मान लेते हैं जो की असल में दुःख हैं ही नहीं, समस्याओं को सुलझाया जा सकता हैं वो स्थिर नहीं होती बल्कि टेम्पररी होती हैं जो एक समय के बाद खत्म हो जाती हैं उसका नामो निशान मिट जाता हैं | और दुःख थोड़ा लम्बे समय तक रहता हैं उस दौरान हमें खुद को संभालना पड़ता हैं |

मोबाइल में इन्टरनेट नहीं चल रहा तो दुःखी हैं, एग्जाम में पास नहीं हुए तो दुःखी हैं, रास्ते में गाड़ी का टायर पेंचर हो गया तो दुःखी हैं, नल में पानी नहीं आ रहा तो दुःखी हैं, ऑफिस देर से पहुंचे तो दुःखी हैं, और आज कल सबसे प्रचलित कि उसने मुझसे बात नहीं की तो दुःखी हैं और भी पता नहीं क्या – क्या | ऐसा हैं या नहीं आप ही सोचिये क्या ये सब दुःख हैं दोस्तों ये छोटी – छोटी समस्यायें हैं जिन्हें सुलझाया जा सकता हैं |

दुःख तो हमारी जिंदगी में बहुत कम होते हैं लेकिन हम अपनी समस्याओं में ही उलझे पड़े हैं और दुःखी रहते हैं तो फिर हम दुःख में कैसे अपने आप को संभाल पाएंगे | और दोस्तों आपको एक मजेदार बात बताता हूँ वो ये की हमारी जिंदगी में थोड़े बहुत दुःख तो होने ही चाहिए क्योंकि अगर दुःख नहीं होगा तो फिर हम सुख का आनंद ले ही नहीं सकते बिना दुःख के सुख का तो पता ही नहीं चलेगा की सुख भी कोई चीज़ होती हैं सुख का कोई अनुभव ही नहीं होगा | जैसे अगर अँधेरा ही अँधेरा रहे तो क्या प्रकाश को कभी देख पाएंगे कभी नहीं संभव ही नहीं हैं, अँधेरा हैं तभी तो प्रकाश हैं, उसी तरह दुःख हैं तभी तो हम सुख को अनुभव कर सकते हैं, आनंद ले सकते हैं अन्यथा तो सुख का कोई मोल ही नहीं होगा |

दोस्तों प्रकृति सभी को बहुत कम दुःख देती हैं चाहे वो इंसान हो या कोई और प्राणी जैसे की पशु,

पक्षी | ये तो हम इंसानों की प्रवर्ती हो गयी हैं, समस्याओं को दुःख मानकर दुःखी बैठे रहते हैं |

दोस्तों खुलकर जीओं खुश रहो समस्याओं से परेशान मत हो उनका सामना करो उन्हें सुलझाओं और अगर कभी दुःख आ भी जाये [भगवान न करे ऐसा हो] तो अपने आप को इतना मजबूत बना लो की आप खुद को संभाल सको |

मैं अगले लेख में इस टॉपिक पर और बात करना चाहूँगा आप इस लेख को पहला पार्ट मान सकते हैं | [ धन्यवाद ]

[ दोस्तों मैंने पहले भी लेख में लिखा था और इस में भी लिख रहा हूँ कि आप अपने सुझाव, या आप चाहते हैं की किसी टॉपिक पर लेख लिखा जाये तो आप मुझे comment करके या contact us में दिए गए email पर बता सकते हैं ]      

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