Life Management

अपना द्रष्टिकोण बदलिए – Change Your Viewpoint

मित्रों आप में से ही एक मित्र ने मुझे comment के जरिये सुझाया हैं कि ”जो आपका नजरिया हैं वही आप हैं” आर्टिकल पर कुछ और बातें की जायें | मुझे बेहद खुशी हैं कि ये आर्टिकल आप सभी मित्रों के द्वारा काफी पसंद किया जा रहा हैं | तो चलिए हम इसी विषय पर कुछ और बातें करते हैं |

दोस्तों मैं यहाँ सबसे पहले एक छोटी सी कहानी का जिक्र करना चाहूँगा जिसे लगभग आप सभी ने सुना होगा | एक मेढंक जो की कुँए में रहता हैं वही उसकी दुनिया हैं वो उसके बाहर निकलता ही नहीं एक दिन किसी ने उससे पूछा कि इस धरती पर सबसे बड़ा जलाशय कोनसा हैं, तो उसने कहाँ कुआँ, जिसमें मैं रहता हूँ | लेकिन क्या ये सच्चाई हैं लेकिन मेंढक के लिए तो यही सच हैं क्योंकि उसने कुँए से बड़ा जलाशय देखा ही नहीं | अब एक तालाब में रहने वाले मेंढक से पूछा गया तो उसने तालाब को सबसे बड़ा जलाशय बताया फिर उससे आगे समुद्र में रहने वाले मेंढक से पूछा गया उसने समुद्र को सबसे बड़ा बताया | क्या आपको लगता हैं की ये तीनों मेंढक गलत बता रहे हैं, नहीं दोस्तों वो तीनों बिलकुल भी गलत नहीं हैं तीनों अपनी -अपनी जगह सही हैं, और इसका सबसे बड़ा कारण हैं कि उन्होंने जहाँ वो रहते हैं उससे बड़े जलाशय देखे ही नहीं वो उससे आगे बढे ही नहीं तो वो गलत कैसे हो सकते हैं | कुँए वाला मेंढक अपने कुँए में मस्त हैं उसने कुँए से बड़ा देखा ही नहीं, तालाब वाला मेंढक तालाब में मस्त हैं उसने तालाब से बड़ा जलाशय नहीं देखा, समुद्र वाला मेंढक समुद्र में मस्त हैं |

दोस्तों इस कहानी से आपको क्या समझ आता हैं आपने ये कहानी सुनी तो बहुत हैं मगर इसका अर्थ शायद ही किसी ने समझा हो |

आप जहाँ रहते हैं, जो सोचते हैं, आप को लगता हैं की बस यहीं हैं | इसके आलावा, इससे बड़ा दुनिया में कुछ हैं ही नहीं | मैंने देखा हैं कि लोग अपने घर को छोड़ने को तैयार नहीं होते घर तो छोड़िये लोग अपने घर के एक कमरे तक सिमट कर रह गये हैं उनको अपने कमरे के बैड के आलावा कहीं नींद ही नहीं आती वो वहीँ रहना चाहते हैं | लोगों की सोच देख लो खासकर कर बेरोजगार युवाओं की वो कॉलेज से निकलते ही बस सरकारी नौकरी की तैयारी में लग जाते हैं और नौकरी नहीं मिली तो खुद की जीवन लीला तक समाप्त कर लेते हैं उनको लगता हैं कि सरकारी नौकरी ही सब कुछ हैं कमाने के लिए क्या सिर्फ सरकारी नौकरी ही हैं बस यही एक हैं, क्या कुछ और हैं ही नहीं | सरकारी नौकरी छोडिये अभी कुछ दिन पहले की ही खबर हैं कि कोटा में एक छात्र ने आत्महत्या कर ली क्यों?, क्योंकि IIT में सिलेक्शन नहीं हुआ ( मैं इस मुद्दे पर फिर कभी बात करूँगा ) | इतनी सीमित हो गई हैं आपकी सोच बस इसके आलावा और कुछ दिखाई ही नहीं देता | दोस्तों इस पर जरा विचार कीजिये |

अपने नजरिये को बढाओ, अपने दृष्टिकोण को बढाओ, अपनी सोच को बड़ा करो दुनिया बहुत बड़ी हैं बहुत कुछ हैं दुनिया में करने के लिए |

मित्रों जैसा की हमने पिछले आर्टिकल ”आप वहीँ हैं जो आपका नजरिया हैं” में कहाँ था कि आप important हैं कि आप क्या सोचते हैं, आपका क्या नजरिया हैं किसी के प्रति, तो आप वही हो जाते हैं जो आपका नजरिया होता हैं, जहाँ तक आप सोच सकते हैं | लेकिन आप यहीं तक क्यों सीमित होकर बैठ गये हैं थोड़ा और आगे बढ़िए न |

दोस्तों उस मेंढक की तरह कुँए में ही मत पड़े रहिये उस कुँए से बाहर निकलिए आपको इस धरती पर उससे भी बड़ा जलाशय मिलेगा | आप अपनी सोच को, अपने नजरिये को बढाइये तो सही, बदलिए तो सही एक बड़ा जलाशय आपका इंतज़ार कर रहा हैं | जो आपका नजरिया हैं, वही आप हैं -1

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